संपत्ति या किसी मूल्यवान वस्तु की अवैध मांग पूरी कराने के लिए उत्पीड़न भी क्रूरता के दायरे में आता है। अदालतों ने अलग-अलग मामलों में स्पष्ट किया है कि मानसिक क्रूरता का आकलन परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है।
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